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ब्रेकिंग द मेंटल जेल: मानसिक बंधनों से आज़ादी
आज की डिजिटल दुनिया में जहाँ आज़ादी का मतलब तेज़ इंटरनेट, अनगिनत विकल्प और ऑनलाइन मौजूदगी से लगाया जाने लगा है, वहीं भीतर ही भीतर हममें से लाखों लोग घुट रहे हैं।
हम सब से जुड़े हुए हैं...
और फिर भी खुद से क disconnected।
यह किताब उन लोगों के लिए है जो महसूस करते हैं कि वे किसी लौह-ज़ंजीर में नहीं,
बल्कि अदृश्य मानसिक चक्रों में फँसे हुए हैं।
यही वह जगह है जहाँ यह किताब आपका हाथ थामती है।
यह आदेश नहीं देती - यह आपसे बातचीत करती है।
यह सिखाती नहीं - यह आपको आपके भीतर ले जाती है।
⭐ इन गहन अध्यायों के माध्यम से आप जानेंगे:
• डिजिटल दुनिया की झूठी आज़ादी
• "मेरे पास समय नहीं है" - इस सबसे बड़े भ्रम का सच
• हर पल दिखते रहने का दबाव
• 'और चाहिए' की अनजानी लत
• चुप्पी से डर क्यों लगता है
• असली पोषण क्या है - मन, शरीर और आत्मा के लिए
• वर्तमान क्षण को reclaim करने की कला
• और सबसे बढ़कर - जागरूकता की शक्ति
हर अध्याय आपकी सोच को नहीं,
आपकी आत्मा को छूने के लिए लिखा गया है।
⭐ यह किताब अलग क्यों है?
क्योंकि यह lecture नहीं देती - यह सुनती है।
यह निर्देशों की सूची नहीं - यह एक सच्ची, गहरी बातचीत है।
इसमें कहानी है, neuroscience है, भावनाएँ हैं और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि भी।
यह किताब उनके लिए है जो सतही जीवन से थक चुके हैं
और अब गहराई की तलाश में हैं।
आप छात्र हों, प्रोफेशनल हों, गृहिणी हों
या बस कोई ऐसा व्यक्ति जो भीतर की शांति खोज रहा है-
यह किताब आपके लिए बनी है।
⭐ सबसे महत्वपूर्ण ब
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