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खून से लिखी आज़ादी
यह डिजिटल पुस्तक भारतीय इतिहास के सबसे निर्णायक और संघर्षपूर्ण दो सौ वर्षों 1757-1947 का एक गहन विश्लेषण है 21000 से अधिक शब्दों में विस्तृत यह कृति मात्र एक ऐतिहासिक विवरण नहीं बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की गाथा है जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी प्लासी के विश्वासघात से लेकर आजादी की पहली सुबह तक लेखक सोधा इकबाल कासम ने राजनीति अर्थशास्त्र और मानवीय संवेदनाओं को एक धागे में पिरोया है यह पुस्तक उन गंभीर पाठकों और विद्यार्थियों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है जो इतिहास को केवल तारीखों में नहीं बल्कि उसके पीछे की आत्मा से समझना चाहते हैं
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