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''दिव्या विजय अंतर्मन के बीच बेहद सहजता के साथ उतरती हैं और सधे हुए कौशल के साथ अंतर्द्वंदो के क्षणों को चुनती हैं। उनकी यह सहजता और उनका यह सधाव चकित करता है। इन कहानियों के मर्म की अनुगूँजें लम्बे समय तक पाठकों के भीतर बनी रहती हैं और भरोसा दिलाती हैं कि आने वाले समय में दिव्या विजय अपनी खास पहचान बनायेंगी।''
-हृषीकेश सुलभ, कथाकार एवं नाटककार
दिव्या विजय ने अपने पहले कहानी-संकलन की अधिकतर कहानियों में स्त्रियों को मुख्य पात्र बनाया है। उनकी प्रत्येक नायिका अपना जीवन अपने विवेक और इच्छानुसार जीना चाहती है और बाहरी बन्धन या आडम्बरों से मुक्त अपने जीवन को सुरीली धुनों से सजाना चाहती है। दिव्या विजय बायो-टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएट और सेल्स एण्ड मार्किटिंग में एम.बी.ए. हैं। रंगमंच पर अभिनय करना उनका शौक है। उनकी कहानियाँ कई साहित्यिक पत्रिकाओं और हिन्दी वेबसाइट पर प्रकाशित हो चुकी हैं। रविवार डायजेस्ट में नियमित स्तंभ प्रकाशित होता है।
'लिट-ओ-फ़ेस्ट, मुम्बई 2017' में इस कहानी-संकलन को श्रेष्ठ पांडुलिपि अवार्ड का सम्मान मिला। 'लिट-ओ-फ़ेस्ट' ने पिछले तीन वर्षों से कई प्रतिभाशाली नये लेखकों की रचनाओं को प्रकाशित करने में योगदान दिया है।
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